जानिए क्यूँ दी जाती है बकरीद पर कुर्बानी- बकरीद से जुडी सबसे खास बात

जानिए क्यूँ दी जाती है बकरीद पर कुर्बानी

आज पुरे देश में ईद-उल-अजहा पूरी श्रद्धा और ख़ुशी के साथ मनाया जा रहा है| ये मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है| वैसे तो ये त्यौहार बकरीद के नाम से बहुत प्रख्यात है| इस दिन मुस्लिम अपने पवित्र स्थल मस्जिद जाकर नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी देते हैं| इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 12वें महीने के धू-अल-हिज्जा के 10वें दिन मनाई जाती है| हालाँकि, आप ये बात हमेशा चर्चा का एक विषय रहा है कि इस दिन कुर्बानी क्यों दी जाती है| तो हम आपको बताते हैं कि ईद-उल-अजहा का मकसद केवल कुर्बानी देना ही नहीं है बल्कि इसके पीछे एक अहम् धार्मिक विचारधारा छुपी हुई है| मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन देश भर से हज करने अरब जाते है| मन जाता है की इस दिन हज जिसको नसीब होता है उन लोगो को बड़ा सबाब मिलता है| केवल कुर्बानी की वजह से ही नहीं बल्कि उनके अल्लाह के प्रति प्यार और समर्पण की वजह से इस पर्व की अहमियत कई अधिक बढ़ जाती है|

जानिए क्यूँ दी जाती है बकरीद पर कुर्बानी
तो आइये जानते है बकरीद पर कुर्बानी देने का रहस्य

ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी देने के पीछे एक बहुत महतवपूर्ण कारण है, इस दिन जानवरों की कुर्बानी दी जाती है| ये इसलिये नहीं की अल्लाह को मांस समर्पित करना होता हैं बल्कि ये अल्लाह को खुश करने के लिए किया जाता है| इसमें अल्लाह अपने मानने वालों की नियत को देखता है| वह चाहता है, की उसके बंदे केवल ईमानदारी से कमाया हुआ धन उनकी राह में खर्च करें| ये पावन पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है|

क्या है बकरीद पर कुर्बानी देने की प्रथा

इस्लाम धर्म के अनुसार, एक बार अल्लाह ने हजरत इब्राहीम से उनकी सबसे प्रिय चीज़ की कुर्बानी देने के लिए कहा तो उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे अपने पुत्र की कुर्बानी देने के लिए हाँ करदी | क्यूंकि, हजरत के अनुसार उनके लिए सबसे प्यारी चीज़ उनका बीटा था, तो उन्होंने उसकी बलि देना के लिए हामी भर दी|

इस दौरान उन्हें लगा की अपने प्रिय बेटे की बलि देते हुए शायद वो खुद को भावुक होने से रोक न पाए इसीलिये उन्होंने अपनी आँखों पर पट्टी बांध ली और अपने बेटे की कुर्बानी देदी| लेकिन जब उन्होंने पट्टी हटा क्र अपनी दृष्टि अपने पुत्र की और डाली तो वह जिन्दा खड़ा हुआ था| उन्होंने देखा की वहाँ एक मेमना कटा हुआ पड़ा है, और तभी से इस त्यौहार पर बकरों और मेमनों की कुर्बानी दी जाती है| इस दौरान अल्लाह ने सिर्फ हजरत की नियत और उसका प्यार ही देखा की कैसे उन्होंने अपने बेटे की परवाह किये बिना अल्लाह के लिए इतनी कड़ी आहुति स्वीकार कर ली|हम आशा करते है की आपको बकरीद पर कुर्बानी देने का रहस्य जानकार अच्छा लगा होगा|ऐसे ही दिलचिस्प ख़बरों के लिए बने रहे हमारी वेबसाइट के साथ|

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